古代からの海洋国 (प्राचीन युग से सामुद्रिक राष्ट्रशैली – Maritime Nations Since Ancient Times)

インドと日本は古代から海洋国家でしたが、ほとんどの他の国々はそうではありませんでした。(ここでいうインドという国は、現在のインドと東南アジアを含めた、大変大きな地域を指します。)インドは少なくとも紀元前630年から世界中を航海していました。

भारत और उषाद्वीप दोनो हि प्राचीन काल से सामुद्रिक राष्ट्र रहे हैं, जब कि अधिकांश अन्य राष्ट्र ऐसे नहीं हैं। भारत, जो यहां वर्णित है, आज का इण्डिया नहीं, अपितु वर्तमान भारत और समूचे दक्षिण-पूर्वी एशिया को अपने लपेट में लेता है। ईसाई युग से कम से कम ६३० वर्ष पहले, भारतीय नाविक बड़े पोतों में विश्व भर में संचारते थे।

Both India and Japan have been maritime nations since ancient times, whereas most other nations have not. India, as I describe it here, is not the present India, but includes current day India as well as the whole of South East Asia. Indians had been, at least since 630 years before the common era, traveling all over the world in large ships.

Ancient ships of India

日本はというと、GHQが焚書して日本の歴史を変えているから、研究するのが簡単ではありませんが、それでも600年には大きな船で遣隋使を出していることは異論がありません。戦後アメリカでは、日本はペリーが1853年に日本を開国させるまで、鎖国していて民衆は圧政に苦しんでいたとプロパガンダを流していますが、おかしいですね。

उषाद्वीप के बारे में जानना कठिन है, क्योंकि अमेरिकीय सैन्य मुख्यालय ने फ़ुन्शो  (पुरातन प्रलेखों के अभिगम्यता का निर्वापन) के आयोजन करके जापानी इतिहास के साथ छेड़छाड़ किया है। तथापि, इस पर कोई विवाद नहीं कि उषाद्वीप ने ६०० ईसवी में एक बड़े जलयान में केनज़ूईशी  (स्वे-राजवंशीय चीन को जापानी नियोग) भेजे। फिर भी, १९४५ से अमेरिका यह कुप्रचार करता फिर रहा है कि १८५३ से पहले विदेशी जगत के साथ जापान का कोई संपर्क नहीं था, जिसके बाद अमेरिका के नौसेनाध्यक्ष पेरी ने उषाद्वीप को परदेशीयों के लिये अपने द्वार खोलने पर निर्बद्ध किया। यह ऐतिहासिक प्रमाण के सरासर विपरीत है।

It is very difficult to research and understand the truth of Japan, as the GHQ has tampered with Japan’s history by conducting funsho (the extinguishing of public access to old documents). Even so, there is no argument that Japan sent kenzuishi (Japanese missions to Sui China) on a large ship in 600. And yet, as of 1945, America has been spreading propaganda saying that the Japanese had no contact with the outside world until 1853, when Commodore Perry of America forced Japan to open its doors to foreigners. This is absolutely contrary to historical evidence.

遣唐使

インドと日本は太古の昔から世界のあちらこちらに船で旅し、貿易や交流をしていました。南インドのチョーラ朝は海軍力が強く、13世紀までアフリカから日本までの海で頻繁に出没する海賊たちから海の安全を守っていました。

भारत और उषाद्वीप दोनो हि प्राचीन काल से विश्व भर का भ्रमण करते, व्यापर और विनिमय चलाते आ रहे हैं। जहाँ तक हमें जानकारी है, १३वीं शताब्दी तक दक्षिण भारत का चोऴ साम्राज्य, उत्कृष्ट सैन्य शक्ति से संपन्न, शान्ति बनाये रखते थे और समुद्री डाकूओं पर दबंग आसेध लागू करते थे।

Both India and Japan, since ancient times, have been traveling throughout the world by boat, trading and exchanging. As far as we know, the Chola empire of South India had excellent military power and maintained peace, controlling pirates in the seas until the 13th century.

1945年まで、日本は大きな領域を西洋の植民地主義から守ろうとしました。

१९४५ तक, जापान ने एशिया का एक विस्तृत क्षेत्र को यूरोपी और अमेरिकीय औपनिवेश से मुक्त कराने का प्रयास किया।

Until 1945, Japan tried to make a vast area of Asia free of European and American colonialism.

残念ながら西洋の植民地政策に打ち勝つことは出来ませんでしたが、インドは1300年ごろまで、日本は1930年ごろから1945年までアジアの海域を欧米の侵略国家から守ろうと努力したのです。アメリカとイギリスと中国とオランダがこの海域にABCD包囲網を引いて東アジアを分断するまでインドと日本は戦い合うことなどありませんでした。

भारत और जापान दोनो हि इस क्षेत्र में शान्ति बनाए रखने में विफल रहे, किन्तु भारतीय नौसेना ने माकिम् १३०० ई. तक यूरोपी और अमेरिकीय आक्रान्ताओं को बाहर रखा, और जापान ने १९३० से १९४५ तक। दोनो एशियाई राष्ट्रों ने यूरोपी और अमेरिकीय आक्रान्ताओं को अपने समुद्रों से खदेड़ने का पूरा प्रयास किया। जब तक अमेरिका, ब्रिटन, चीन और डच देशों ने पूर्वी एशिया को अपने ‘ए.बी.सी.डी.’ घेराओ में लेकर अलग नहीं किया था, भारत और उषाद्वीप के बीच युद्ध की एक भी घटना नहीं मिलती।

Both India and Japan failed to keep the peace in this area, however the Indian navy had been trying to keep European and American invaders out of this area until about 1300, and the Japanese navy had been doing the same between 1930 and 1945. Both Asian nations tried their very best to expel the European and American invaders from their waters. Until America, Britain, China and the Dutch created their ABCD encirclement and separated East Asia, there was not even one incidence in which India and Japan ever fought.

東アジアの海では交易があり、外航船が行き来していたばかりではありません。漁師も漁場を求めて遠くまででかけていったのです。そして、難破して、外国に長い間住んだり永住した漁師なども沢山いました。1612年には播磨国の天竺徳兵衛として知られる男が、そして1762年には筑前国の孫七という男がインドに漂流したという記録が残っていますが、そんな例は全く氷山の一角です。

पूर्वी एशिया के समन्दरों में न केवल व्यापारी-पोत थे, किन्तु धीवर-पोत भी मछलीयों को पकड़ने इन सागरों में जालकर्म चलाते थे। ऐसे बहुत प्रसंग मिलते हैं जहां मछुआरे अपने समुदाय से निकाले जाते थे और विदेशों में बस जाते थे। इस बात के अभिलेख हैं कि १६१२ में हरिमा के तेन्जीकु तोकोबेई और १७६२ में एचिज़ेन के मागोशीची जैसे मछुआरे भारत पहुंचकर वहाँ कई वर्ष बिताये। अपितु यह मात्र हिमशैल की शीर्ष की झलक है, और बहुत से ऐसे बिखरे भटकैयों का कोई अता-पता नहीं रहा।

In the waters of East Asia, not only there were trading ships, but also fishing boats, which frequented these waters in search for fish. There were many occasions on which fishermen became castaways and lived in foreign lands. There are records that fishermen such as Tenjiku Tokubei of Harima in 1612, and Magoshichi of Echizen in 1762, went to India and lived there for many years. However, this is only the tip of the iceberg, and many other such castaways have likely gone unrecorded.

インドから日本まで古代から海を通して繋がっていたのだという歴史を、インド人と日本人と東南アジアの人たちが一緒になって若い世代に教えなくては、アジアはい更に細かく分割され、消滅していくことになりかねません。

जब तक कि हम भारतीय, उषापुत्र और दक्षिण-पूर्व एशिया की समस्त जनता इस बात का स्मार नहीं रखेंगे कि प्राचीन युग से भारत समेत पूर्वी एशिया अत्यंत हि घने रूप से जुड़ा हुआ था, तब तक हम यूरोपीयों और अमेरिकीयों को इस सभ्यता के टुकड़े-टुकड़े करने की अनुमति प्रदान करते जायेंगे, और उस प्राचीन सहभागिता की नास्ति नाभूत् की दशा तक यही चलता रहेगा।

Unless we Indians, Japanese, and all the people of South East Asia, remember that East Asia along with India was extremely well connected since ancient times, we will end up allowing Europeans and Americans to fragment this civilization into bits and pieces, until it exists no longer.

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