カナダを造ったのは誰? (कनेडा का निर्माण किसने किया? – Who Built Canada?)

カナダといったら白人の国というイメージがあります。でも、結構そんなイメージもつい最近メディアを通して作られたものなのです。そして、東部はフランス人が、西部はイギリスがという印象がありますが、それも単なるイメージ付けなんです。

यह छवि प्रचलित है कि कानाडा गोरों का देश है। परन्तु वास्तव में यह छवि अचिर हि कृत्रिम रूप से मीडिया के द्वारा बनाया गया है। यह भी एक काल्पनिक छवि है कि पूरबी कानाडा में अधिकतर फ़्रांसीय लोग बसते हैं और पश्चिमी कानाडा में ब्रिटिश मूल के लोग।

There is a prevalent image that Canada is a nation of Whites. However, in reality, this image has only recently been artificially created using media. It is also a fabricated image that eastern Canada is largely inhabited by French, and western Canada by the British.

いまのブリティッシュ・コロンビア州はイギリスが進出してくるまではスペイン人が定住していた所でした。今でも地名にその名残が残っています。東部はバイキングが住み着くことで発展しました。

कानाडा के जिस प्रदेश को आज ब्रिटिश कोलंबिया कहते हैं, वह ब्रिटिश आक्रमण से पहले स्पेनी अधिवासियों से बसा था। आज तक कई जगहों के नाम स्पेनीय हैं। फ़्रांसीय और ब्रिटिश आक्रमण से बहुत पहले, कानाडा के पूरबी तट पर वाईकिंग बसे थे और नगरों का निर्माण भी किया।

The area of land that comprises present day British Columbia, Canada, was inhabited by Spanish settlers before the British invaded. Even to this day, many place names are still Spanish. Before the French and British invaded the east coast of Canada, it was Vikings who settled there and developed towns.

今のカナダは日本の明治維新と時を同じくして、大英帝国の一部として作られました。そのカナダの基礎を作ったのはインド人と日本人です。白人の数が少なかった頃のことです。インド人が鉄道を作り多くの産業や林業に携わり、日本人が産業と工業と農業と漁業と林業と造船をしました。そして、インド人と日本人の努力によって国の形が出来たら、白人たちがインド人と日本人を追い出し、財産を奪い取って、白人のためのカナダを造り上げたのです。

जिस कानाडा को हम आज जानते हैं, उसका ब्रिटिश साम्राज्य के एक प्रान्त के रूप में विलय उसी समय किया गया जब उषाद्वीप पर मेइजी पुनःप्रतिष्ठा घटी। तभी लोगों को सक्रीय रूप से कानाडा में लाया गया, जिससे कि इस नये देश का निर्माण हो सके। यह लोग भारतीय थे, जो कि ‘ब्रिटिश’ राज्याधीन होने के नाम लाये गये, और उषापुत्र, जिनको ब्रिटन ने बुलावा दिया। उस समय कानाडा में अधिक गोरे नहीं बसे थे। ब्रिटिशाधीन आवासी भारतीयों ने वहाँ रेल-व्यवस्था का निर्माण किया, और विविध उद्योगों में भागीदार बने, जैसे वानिकी (वन उद्योग), और जापानियों ने कई उद्योगों में अहम भूमिका निभाई, जैसे प्रौद्योगिकी, कृषि, मत्स्य उद्योग, वानिकी, पोत-निर्माण इत्यादि। जैसा हि वह देश भारतीयों और जापानियों के कठोर परिश्रम से एक सुनियोजित संरचना में ढलने लगा, गोरों ने उनको वहाँ से मार भगाया। उन्होंने उनकी सारी धन-संपदा की चोरी करके कानाडा को गोरों के लिये आगे बढ़ाया।

Canada as we know it today was established as a part of the British Empire around the same time as the Meiji Restoration of Japan. People were then actively brought into Canada to build this new nation. Those people were the people of India, brought in as British, as well as Japanese who were invited in by Britain. At that time, there were not many Whites living in Canada. British Indians built railways and engaged in various industries including forestry, while Japanese played a major role in various industries, technology, agriculture, fishery, forestry, ship building, etc. As soon as the country took shape, thanks to the hard work of Japanese and Indians, the Whites chased them out of the country. They stole all of their wealth and property, and built Canada for Whites.

鉄道や街が出来上がり、産業・経済が安定するやいなや、1908年にカナダ政府はインド人がこれ以上カナダに移り住めないようにするための人種差別的法律を作りました。そして、それに反発して1914年5月23日に駒形丸事件が起きました。それは、ラス・ビハリ・ボースがラホールの爆発事件に失敗して日本に亡命する一年前のことでした。

जौसा हि कनेडा की रेल-व्यवस्था का निर्माण पूरा हुआ, और उद्योग और अर्थव्यवस्था संभल गई, तभी १९०८ ईसवी में वहाँ की सरकार ने ‘निरन्तर यात्रा विनियमन’ विधान पारित किया, जिसका उद्देश्य कानाडा में आने वाले ब्रिटिशाधीन भारतीयों की संख्या को सीमित करना था। इस नये कानाडाई नीति को चुनौति देने के लिये २३ मई १९१४ को कोमागातामारु घटना घटी। यह रास बिहारी बोस के लाहौर विस्फोट द्वारा ब्रिटिश साम्राज्य को दहला देने के विफल प्रयास के लगभग एक वर्ष पहले की बात है, जिस प्रयास के बाद बोस उषाद्वीप पलायित हुए।

Soon after the railway construction was completed and the Canadian industries and economy became stable, in 1908, the Canadian government passed the Continuous Journey Regulation, the purpose of which was to restrict the number of British Indians immigrating into Canada. To challenge this new Canadian policy, the Komagatamaru incident occurred on May 23, 1914. This was about one year before Rash Behari Bose failed in his attempt to shake up the British Empire with the Lahore bombing incident, after which he escaped to Japan.

駒形丸事件のおおよそは次の通りです。シンガポールの実業家グルディット・シンが日本の船駒形丸をチャーターしてカナダ政府の人種差別的移民政策にチャレンジしました。400人の英国籍インド人乗客を乗せ、香港から上海と横浜に寄港してバンクーバーに到着した船は2ヶ月もバンクーバーの港で立ち往生させられた後、強制的にインドに戻されてしまいました。2ヶ月後の9月26日に駒形丸がインドに到着した時、バッジバッジという町で暴動騒ぎがおきました。騒動を予測して控えていた警察が発砲、19人の死者を出しました。この1914に起きた事件については、カナダからインド人に対する謝罪が、ほんのつい最近の2014年にあったばかりです。まさに100年経ってから収まったのです。

कोमातागारु घटना का संक्षिप्त वर्णन कुछ इस प्रकार है। सिंघापुर के एक सिक्ख व्यवसायी, गुरदित सिंह, ने कानाडा के इस वंशभेद और जातिवादी नीति को चुनौती दी। उन्होंने एक जापानी जलपोत ‘कोमातागारु’ किराये पर लेकर ब्रिटिश पारपत्र रखने वाले ४०० भारतीय सवारीयों के साथ वानकूवर पत्तन पहुँचे। कानाडा सरकार ने केवल कुछ हि सवारीयों को उतरने की अनुमति दी, परन्तु २ महीने पत्तन पर हि निलंबित रखकर फिर उनको वहाँ से भगाया। २६ सप्तम्बर को, २ महीने यात्रा के उपरांत, पोत बज-बज (बंगाल) के पत्तन पर वापस लौट आया। पहुँचते हि दंगा फूट पड़ा, और स्थानिक ब्रिटिश सरकार के पुलीस, जो वहाँ दंगा की पूरी प्रतीक्षा में तैयार खड़ा था, ने यात्रिकों पर गोली चलाई, जिसमें १९ मारे गये। १९१४ के इस घटना को २०१४ तक अनसुना कर दिया गया, जब कानाडा सरकार ने अन्ततः औपचारिक रूप से खेद प्रकट की। उस यात्रा के सच्चे उद्यापन को १०० बरस लगे।

A brief summary of the Komagatamaru incident is as follows. A Singaporean businessman, Gurdit Singh, challenged the Canadian racist policy. He chartered a Japanese ship, Komagatamaru, and arrived at a port in Vancouver with about 400 Indian passengers holding British passports. The Canadian government allowed only a few passengers to disembark, but shooed them off after keeping them docked at the port for 2 months. On September 26, after 2 months of travelling, the ship arrived back at the port in Budge Budge, India. When they arrived, a riot broke out, and the police who were waiting there for the riot to occur shot at the passengers, killing 19. This incident of 1914 was ignored until 2014, at which time the Canadian government made a formal apology. It took 100 years to see some form of completion.

この事件はラス・ビハリ・ボースが首謀者の一人となったガダル党と密接な関係があります。駒形丸事件はガダル党の連続爆破事件に発展しました。彼は1915年2月に総決起することにしましたが、裏切り者たちがイギリスに通報したので失敗してしまいました。それが彼の日本亡命という結果を引き起こしたのです。

इस घटना का ग़दर पक्ष से गहरा संबंध था, जिस पक्ष के ५ नेताओं में से रास बिहारी बोस एक थे। १९१४ के कोमातागारु घटना के अनु १९१५ का विस्फोट हुआ, जिसमें देशीयों ने भारत के विभिन्न जगहों पर और सिंघापुर में एक साथ विस्फोटों की योजना बनाई। रास बिहारी बोस और कुछ साथीयों ने लाहौर में फ़रवरी २०१५ में विस्फोट करने का प्रयास किया, परन्तु यह विफल रहा क्योंकि उनके गण में स्पश छिपे थे जिन्होंने ब्रिटिश को योजना का निवेदन कर दिया। इसी कांड के कारण रास बिहारी बोस को उषाद्वीप पलायन करना पड़ा।

This incident was deeply connected to the Ghadar Party, in which Rash Behari Bose was one of 5 leaders. The Komagatamaru incident of 1914 was followed by the bombing incident of 1915, in which Indians plotted bombings to take place simultaneously at several locations across India and Singapore. Rash Behari Bose and others tried to bomb Lahore in February 1915, but this ended in failure because there were spies hiding within their group and secretly reported the plan to the British. It was because of this that Rash Behari Bose ended up escaping to Japan.

ラス・ビハリ・ボースが命をかけた仕事は今なおこのようにして続いているのが分かりますね。

अब तक आप को इस बात का भान होना आरंभ हो चुका होगा, कि रास बिहारी बोस के प्रयास किस प्रकार आज तक जारी हैं।

By now, you might have begun to see how the efforts of Rash Behari Bose are continuing even to this very day.

イギリスは、イギリスから大西洋と太平洋を渡って日本侵略するためにインド人を使ってカナダの東部から西部まで繋ぐ長い鉄道を造りました。この鉄道建設は全部イギリス人の貢献、そして、中国人の労働者を使ったということが繰り返されていますがインド人については語ることがありません。一昔前まではインド人が鉄道工事をしている写真が簡単に見られたのですが、何故か見当たらなくなりました。下の写真はインド人がナイロビで鉄道工事に係わっている写真ですが、このような写真が沢山カナダには眠っているのです。

भारतीय लोगों का उपयोग करके ब्रिटिश ने कानाडा के विशाल क्षेत्र को लांघते हुए एक अतिदीर्घ रेल-व्यवस्था का निर्माण किया। इस रेल-संपथ का राजनैतिक उद्देश्य आंग्लदेश से उषाद्वीप तक इस भूखंड द्वारा एक सीधा मार्ग का निर्माण था। वह अब अन्ध महासागर (अटलांटिक) की जलयात्रा करके, उत्तर-अमेरिका महाद्वीप को इस रेल-संपथ द्वारा लांघकर, फिर पाल उठाकर प्रशांत महासागर पारकर उषाद्वीप पहुँच सकते थे। कानाडा के लोग प्रायः बड़ी बातें करते हैं कि कैसे रेल का निर्माण ब्रिटिश (गोरों) ने चीनी श्रमिकों से करवाया था, परन्तु इसमें भारतीयों का श्रेष्ठ योगदान का उल्लेख करना भूल जाते हैं, या जान-बूझकर करने से बचते हैं। बहुत वर्ष पहले मैं ने इस निर्माणकार्य में सिक्ख श्रमिकों के छायाचित्र देखे, परन्तु किसी अनजान कारण वह चित्र आजकल कहीं दिखाई नहीं देते। नीचे नाईरोबी (केन्या) में रेल-संपथ बनाते भारतीय श्रमिकों का चित्र है। ऐसे हि बहुत सारे चित्र कानाडा के हैं।

Using the people of India, the British constructed a very long railroad which transverses Canada. The purpose of the railway was to build a direct path from England to Japan through its territory. They could sail across the Atlantic Ocean, travel the North American continent on the Canadian Railway, arriving at Vancouver, and then go across the Pacific Ocean to Japan. Canadians talk about how British (Whites) accomplished building the railway using Chinese labourers, but often fail to mention, or deliberately hide, the massive contribution of the people of India. Decades ago, I saw many pictures of Sikh railway construction workers, but for some strange reason, they are nowhere to be seen in public any more. The picture below is of Indian workers building railroads in Nairobi. There are many pictures similar to this in Canada.

では、カナダの日本人についてお話しましょう。あまらり聞かないことですが、実はカナダ政府は大東亜戦争が勃発する前(真珠湾攻撃の前)から日系人を追い出しにかかったのです。真珠湾攻撃が起きたのでカナダ政府は日系人を強制収容所に入れたのだとプロパガンダを繰り返していますが、これは嘘なのですよ。実際は大東亜戦争勃発を予定していて、日系人に身分証明書をもたせ一人一人に番号をつけたのです。そして、戦争が始まると同時に要領よく強制収容して、極寒のロッキー山脈に送ったのです。

अब कानाडा के उषापुत्रों के बारे में कुछ चर्चा। मझधार मीडिया वोले इस बात पर मौन साधते हैं, पर सच तो यह है कि जापानियों को कानाडा से निकाल भगाने की योजना पर बृहत् पूर्वी एशियाई युद्ध के प्रारंभ के बहुत पहले हि (अर्थात् कुख्यात पर्ल पत्तन प्रहार के पहले हि) कानाडा सरकार ने क्रियान्वयन शुरू किया था। आज भी वे यह कुप्रचार फैला रहे हैं कि पर्ल पत्तन प्रहार हि कारण था कि जापानी-मूल के कानाडावासियों को बन्दी-शिबिरों में धकेला गया। यह मात्र झूठ है। विषय का सच तो यह है कि कानाडा की सरकार को बृहत् पूर्वी एशियाई युद्ध के प्रारंभ की पूर्वसूचना थी, और पहले से हि उन्होंने हर जापानी कानाडावासी को पहचानपत्र थामकर व्यक्तिगत अंक से निर्धारित किया, और उनको हर समय इस पत्र को अपने पास रखने का आदेश जारी किया। यह पर्ल पत्तन कांड के आधे वर्ष से भी अधिक काल पहले घटी। ऐसे करने से युद्ध छिड़ते हि कानाडा सरकार बड़े स्फूर्ति से सारे जापानीमूल निवासियों का निग्रहण करके उनका रॉकी पर्वतों के घातक ठंड में कारावास कर डालने की क्षमता रख सकी।

I will now discuss the Japanese in Canada. Mainstream media and education remain silent about this, but the Canadian government started their plan to oust Japanese from Canada well before the outbreak of the Greater East Asia War. (i.e. before the notorious Pearl Harbour attack). They are still continuously spreading the propaganda that the Pearl Harbour attack was the reason why Japanese Canadians were thrown into concentration camps. This is only a lie. The truth of matter is that the Canadian government knew ahead of the outbreak of the Greater East Asia War, and they started assigning ID numbers to each and every Canadian of Japanese origin, and forced them to carry this numbered ID with them at all times. This happened much longer than half a year before the Pearl Harbor incident. By doing so, as soon as the war broke out, the government could efficiently capture Japanese and imprison them in the deadly freezing Rocky Mountains.

9 months before Pearl Harbor, this Japanese Canadian was prepared to be rounded up in a concentration camp

当時造船をしたのは日本人、農地を開拓したのも、町を造ったのも、工場を造ったのも日本人でした。パルプ、漁業、林業も日系人の業績でした。カナダ政府はそれを全部取り上げて新しく導入した白人移民者に分配したのです。

उन दिनों कानाडा में केवल उषापुत्र निवासी हि पोत-निर्माण में उत्कृष्ट निपुणता रखते थे। इस के अतिरिक्त, वे खेती का विकास, नगरों का और यन्त्रागारों का निर्माण भी कर रहे थे। लुगदी विनिर्माण, मत्स्य उद्योग, और वानिकी उन कुछ अन्य प्रकार के उद्योगों में से थे जिसे वे स्थापित कर रहे थे। कानाडा सरकार ने यह सब छीन लिया, यूरोप से भारी संख्या में गोरे ला बसाया, और इस धन-संपदा को उन नवागतों में नीलाम कर दिया।

In those days, only Japanese were highly skilled at shipbuilding. Furthermore, they developed farms, built cities and factories. They also established pulp industries, fisheries and forestry, to name a few. The Canadian government stole them all, brought in a phenomenal number of Whites from abroad, and distributed their wealth to these Whites.

そして、終戦後5年近くの1949年まで日系人を収容所に幽閉しておきました。収容所に入っている間日本人からは家賃をとっていました。そして、日本人から取り上げた土地家屋や財産を白人たちに二足三文で売り飛ばしたのです。白人の数と言っても限られていましたから、白人をヨーローッパから移民させて、日系人の財産を分配するのに終戦までには終了出来なかったのです。

कानाडा सरकार ने उन जापानियों को बन्दी शिबिरों से १९४९ तक नहीं छोड़ा (युद्ध के अन्त के पूरे ५ वर्ष बाद!)। उन्होंने अपने जापानी नागकरिकों से बन्दी शिबिरों में वास के लिये भाड़ा भी संचित करने की धृष्टता करी। उन जापानियों की संपत्ति उतनी भारी थी कि सरकार को गोरे समुदाय में बेचकर वितरित करने में उतने वर्ष लगे। उन दिनों कानाडा में उतने गोरे थे हि नहीं जो जापानी नागरिकों की सारी संपत्ति को कीनकर चलाने में सक्षम हों। इसिलिये यूरोप से नूतन गोरों के आगमन और स्थानिक जापानियों की संपत्ति के लूट-बिकने में कुछ वर्ष बीत गये।

The Canadian government did not release Japanese from the concentration camps until 1949 (5 years after the end of the war!). They even had the audacity to charge Japanese Canadians rent for their stay in the concentration camp. The Japanese had so much wealth that it took that long to sell them off completely to Whites. In those days, there were not enough Whites in Canada to claim everything that the Japanese possessed. It took that many years for Whites to immigrate from Europe and steal all the Japanese people’s possessions.

カナダでは今でも日系人に真珠湾のプロパガンダを垂れ流しています。日系人達は自分を10年近くも強制収容所に入れた白人たちを恨むのではなく、白人に悪辣な行為をさせたのは日本人だと言って本国の日本人を恨み続けています。

फिर भी आज तक कानाडा की सरकार यह कुप्रचार दोहराती रहती है कि उषाद्वीप के पर्ल पत्तन प्रहार ने गोरों को “निर्बद्ध” किया कि वे जापानी नागरिकों को बन्दी शिबिरों में काराकृत करें (और सुविध यह बताना भूल जाते हैं कि उन्होंने उन जापानियों की संपत्ति को लूटा)। इस कारण जापानी कानाडावासीयों को गोरों के प्रति कोई द्वेष नहीं कि उन्होंने अपनों को घर से बाहर घसीटकर शीन रॉकी पर्वतों में लगभग १० वर्ष काराबद्ध किया था, और संपत्ति लूटकर उनको नंगा छोड़ा। प्रत्युत, वे उषाद्वीप से द्वेष रखते हैं कि उन्होंने गोरों को ऐसी स्थिति में डाला कि अपने जापानीमूल स्वदेशियों के साथ ऐसे अमानुष अत्याचार ढाने होतु बेचारों पर निर्बन्ध आ पड़ा।

Still to this day, Canada persistently repeats the propaganda that it was the Japanese attack on Pearl Harbour that “forced” Whites to incarcerate Japanese into concentration camps (and conveniently forget to mention that they stole all the Japanese property.) For this reason, Japanese Canadians do not resent Whites for throwing them out of their homes and imprisoning them in the freezing Rockies for nearly 10 years and stripped them naked. Rather, they resent Japan for forcing Whites to be in a position where they had no choice but to conduct such inhuman acts on their fellow citizens.

カナダ建国から現在に至ってもカナダにはイギリス人とオランダ人と中国人の移民が推進されています。インド人と日本人が命をかけてカナダの基盤を造ったことについては、微塵も述べられることはありません。

कानाडा की स्थापना काल से ब्रिटिश, डच और चीनी लोगों के बसने-रहने को प्रोत्साहन मिलता आ रहा है। लोग यह कभी बोलते नहीं कि जापान और भारत को लोगों ने कानाडा की नींव संरचना बनाने में अपने प्राणों की आहुति दी थी।

Since the establishment of Canada, immigration is encouraged for British, Dutch and Chinese to move in to Canada. People never mention that the people of Japan and India sacrificed their lives to establish the foundations of Canada.

余談ですが、次の写真を見てください。バンクーバーで日系人の店が襲撃された時の写真です。右端にインド人が写っていますね。この人が良く切り取られていることがあります。

यह तनिक अतिरिक्त सूचना है, कृपया नीचे दिये छायाचित्र को देखें। यह एक जापानी आपण है जिसपर गोरे अथवा/और चीनी लोगों ने जातिगत द्वेष के परिणाम-स्वरूप प्रहार किया। नीचे दाहिने ओर एक सिक्ख भद्र दिखाई देते हैं। इस चित्र के चकराते अनेक संस्करणों में किसी अज्ञात कारणवश इस भले मानुस को दृश्य से काट-छाँट दिया गया है।

This is a little additional information, but please take a look at the picture below. This is a photo of a Japanese store that had been attacked by Whites and/or Chinese as a result of racial hatred. You can see a Sikh gentleman in the bottom right. In many circulating versions of this picture, for some strange reason, he is trimmed off.

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