ココナッツとバナナ (नारियल और केले – Coconuts and Bananas)

coconut and banana

英語圏ではココナッツとバナナが 、人に例えて使われることがあります。ココナッツは肌が茶色いのに、頭の中が白人だということで、バナナは肌が黄色いのに、頭の中が白人だという意味です。

आंग्ला बोलचाल में नारियल और केला शब्द उपमा के रूप में कुछ मानव लक्षण के लिये प्रयोग होते हैं। नारियल शब्द उन लोगों का वर्णन करता है जिनकी त्वचा बादामी रंग है किन्तु जो भीतर से गोरे हैं, और केला उन लोगों के लिये जिनकी त्वचा पीली-सी है परन्तु भीतर से गोरे।

In the English language, the words coconut and banana are used to describe some features of human qualities. Coconut is used to refer to a person who has brown skin, yet is white inside, whereas a banana is a person with yellow skin, but who is white inside.

つまり、有色人種であろうと、白人に洗脳されつくされてしまっていて、白人至上主義になっている人たちをココナッツとかバナナというのです。これらの言葉は、白人至上主義を否定する人たちの間では軽蔑的な意味で使われますが、白人至上主義に浸っている有色人種たちは、自分のことを指してポジティブな意味で使います。つまり、上辺は劣勢な有色人種だが中身はは優等な白人なのだ、それは立派なことなのだという考えを表現するために使われたりするのです。

दूसरे शब्दों में, रंग वाले लोग जो पूरी तरह से मुग्ध हो चुके हैं और गोरों की मान्यताओं के कुली बनते फिरते हैं, अपने आप को गर्व से नारियल और केले कहते हैं। जो लोग गोरा-सर्वोत्तमत्व को नकारते हैं, वे इसी शब्द को अपमान के रूप में प्रयोग करते हैं, अपितु जो गोरे सभ्यता को वास्तव में सर्वोत्तम मानते हैं, वे इन शब्दों का सकारात्मक प्रयोग करते हैं। यह दूसरे प्रकार के लोग इन शब्दों का प्रयोग अपने लिये गर्व से यह दिखाने के लिये करते हैं कि बाहर से उनका रूप-रंग भले हि अलग हो, परन्तु उनका विश्वास है कि उन मान्यताओं के भृत्य बनकर वे गोरों के समान बन चुके हैं।

In other words, coloured people who are brainwashed and bear the same values as whites proudly refer to themselves either as coconuts, or bananas. These terms can also be used as an insult by people who reject white supremacy, but those who are white supremacists themselves use these terms in a positive sense. The latter use the words, coconut and banana to show with pride that, irrespective of their outward appearance, they believe that they are as good as white people.

例えば、日本人の中でも英語が上手な人にはバナナが多いです。北アメリカに移住した日系人には更に多いです。ほぼ全員といってもいいでしょう。そして、日本人の中に紛れ込んでいる自称日本人、しかし中国人又は朝鮮人という人たちもほとんどがバナナです。

उदाहरणतः, जापानी लोग जो आंग्ला में पक्के प्रवीण हैं, अधिकतर केले होते हैं। वह जापानी जो उत्तर अमेरिकीय महाद्वीप आ बसे, सामान्य तौर पर केले बनते हैं। और ऊषाद्वीप में बसे लोग जो अपने चीनी अथवा कोर्याई जाति पर गर्व करते हैं, उनमें से भी अधिकांश केले होते हैं।

For example, Japanese people who are extremely proficient in English are mostly bananas. Japanese who immigrated to North America are typically bananas. And, most people who reside in Japan, yet proudly have Chinese and Korean lineage, are often bananas.

インド人も同じです。1947年に今のインドができた時、黄色人種が住んでいた地域は全てインドでは無くなってしまったのですが、インド人の白人至上主義者にはココナッツもいればバナナもいます。

भारतीयों के बारे में भी कुछ ऐसा हि कहा जा सकता है। १९४७ में जब भारतीय गणतंत्र की नींव रखी गयी, यद्यपि लगभग सारे ‘पीले’ जातियों को भारत से विच्छिन्न किया गया, फिर भी कुछ नारियल और केले बचे रहे, अर्थात् गोरे सभ्यता को सर्वोत्तम मानने वाले भारतीय लोग।

A similar thing can be said for Indians. When India was established in 1947, although most of the “yellow” races were cut off from India, there were coconuts and some bananas, i.e. Indian White Supremacists.

インド人が白人至上主義に侵されたのは、イギリスが大変込み入った汚い手を使って洗脳したり人種淘汰したりしたからです。

भारत के कई प्रभावशाली लोग गोरे सर्वोत्तमत्व के भृत्य इसलिये बने कि ब्रिटन ने जनता और अधिकारी व्यवस्था पर मतारोपण और अनुवंशीय नियंत्रण के कुटिल चाल लागू किये थे।

The reasons why many people of India became white supremacists was because British used dirty tricks of brainwashing and genetic control.

Queen Elizabeth and Prince Phillip

イギリスはイギリス男性をインドに沢山送りました。そして、ほとんどの人たちが数年ほどしかインドに滞在しなかったのですが、入れ替わり立ち替わり次々と新しいイギリス人男性を送り込み、そして、現地妻を作り、妾を作り、はては無闇矢鱈にあちらこちらで強姦することまで奨励したのです。女達を守ろうとしたインド人男性たちは無残に殺されたり片端にされたりしました。1857年に起きたインド独立戦争を前後していかにイギリスの白人たちがインド人女性を強姦したり唆したりして父無し子を産ませたかなどを白人自身が本に買いたり語り伝えたりしています。

उनके औपनिवेशिक काल में ब्रिटन ने कई गोरे लोगों को भारत भेजा था। उनमें से हर एक ने भारत में केवल कुछ हि वर्ष बिताये, परन्तु उस लघुकाल में उनको देशी पत्नी और कई उपस्त्री रखने की प्रेरणा दी जाती थी। देशी स्त्रियों का बलात्कार और उनसे वर्णसंकरित सन्तान का प्रजनन का भी प्रोत्साहन किया जाता था। जिन्होंने देशी स्त्रियों की रक्षा की, उनको निर्दयी मृत्यु या अपाहिज जीवन से दण्डित किया जाता था। १८५७ के युद्ध से पहले और पश्चात्, देशीय लोककथओं और ब्रिटिश सैनिकों के उपन्यासों में बलात्कार या फिर देशी स्त्रियों के साथ अटखेलियों और वर्णसंकर के बहुत उल्लेख हैं।

Britain sent many white men to India during their colonial period. Each of these men stayed only for a few years, but were encouraged to have Indian wives and concubines during their brief stay. They were even encouraged to rape Indian women and produce as many mixed blood offspring as possible. Those who defended Indian women were either brutally killed or were severely crippled. Before and after the War of 1857, many references to rape or casual romances and bastardized offspring with Indian women are mentioned in Indian oral stories and novels written by British soldiers.

すると、白人の血を引いた子どもたちが沢山生まれました。その合いの子たちに、イギリスは特権を与え、純粋なインド人と差をつけました。純粋なインド人達は家畜よりも酷使されている一方で、混血のインド人はインド人同胞たちを酷使するがわにつきました。

ऐसे करने से आंशिक आंग्ल रक्त के कई देशी सन्तान जन्मे। ऐसे बच्चों को विविध विशेष सुविधाएं दी जाती थी, और सामान्य देशी बच्चों से ऊंचा स्तर और व्यवहार प्रदान किया जाता था। जबकि भारत के लोगों से पशुधन से भी नीच व्यवहार किया जाता, इन मिश्रित वर्णसंकर जाति वोलों को आंग्लवंश-रहित लोगों के दमन करने की पदवी पर नियुक्त किया जाता था।

By doing so, many Indian children with partially white blood were born. These children were given various privileges, and were treated better than other children. While the people of India were treated lower than their own livestock, Indians of mixed blood were given the position of mistreating those without white blood.

そして、混血のインド人達は英語環境で育ち、イギリス式のユニークな生活習慣と食事習慣で育ったのです。そのような人たちは、イギリス人の血を引いていない人を軽蔑しました。(インドが独立してから、白人の血をひいたインド人たちの多くはオーストリアやイギリスに移民していきました。それなのに、その後でもしばらくの間インドの国会には2つの議席がイギリス白人の血とインド人の混血に確保されていたのです。)

मिश्रित वर्णसंकरित भारतीय लोगों को सामान्यतः एक आंग्लीकृत परिवेश में पाला-पोसा जाता था, और विशिष्ट आंग्लो-भारतीय खान-पान और रहन-सहन के अभ्यस्त होते थे। वे अपने देशवासियों को नाक ऊँचा करके देखते थे, जिनमें आंग्ल लहू का लेश मात्र नहीं था। (स्वतंत्रता के बाद, इस वर्णसंकरित जाति के कई लोग औष्ट्रेलिया या आंग्लदेश गये, फिर भी कुछ समय तक भारतीय संसद् में उनके लिये दो स्थान आरक्षित हुआ करते थे।)

Indians of mixed blood were typically raised in an English environment, and were accustomed to the food culture and life style unique to Anglo-Indians. They looked down upon their fellow Indians who did not even have a trace of white blood. (After Indian independence, many of these descendants of miscegenation emigrated to Australia or England, but even then for some years, two seats in independent India’s Parliament used to be reserved for these Anglo-Indians.)

Anglo Indians

たとえ、イギリス人の血を引いていないインド人でも、子供を良い地位に就かせようと思ったら、幼い頃から英語環境で育て、イギリスに留学させることに専念しました。特に資産家や教養のある家柄や政治家や弁護士階級は白人至上主義・白人崇拝的に子孫を育てました。

जो भारतीय गोरे वर्णसंकर के नहीं थे, उनमें से भी कई परिवार अपने बच्चों को आंग्लीकृत परिवेश में पाल-पोसकर शिक्षा हेतु आंग्लदेश भेजा करते थे, जिससे कि उनके सन्तान दूसरे भारतीयों से ऊँचा उभर सके और ऊँचे सरकारी या आर्थिक पदों को पा सके। विशेषकर, ऊँचे वर्ग के भारतीय, विद्या-सम्पन्न परिवार, राजनेता, अधिवक्ता इत्यादि अपने सन्तान को गोरा-सर्वोत्तमत्व के पूजक और साधक बनाते थे।

Even those who were not of white lineage, if they wanted to be above everybody else, and wished for their children to assume a high position, they brought up their offspring in an English environment and sent them to England for education. In particular, upper class Indians, highly educated families, politicians, and lawyers, typically raised their offspring to be white supremacists and white worshipers.

ここにラス・ビハリ・ボースとスバス・チャンドラ・ボースとの大きな違いがあるのです。ラス・ビハリ・ボースは幼い頃母を亡くし、父も単身赴任していて親の愛情を十分に受けずに育ちました。そして、父親も単身赴任した位ですから、決して資産家ではありませんでした。教育も西洋に留学するどころか、高等学校そこそこしか受けませんでした。白人至上主義・白人崇拝的に育つはずはありません。

इसी में रास बिहारी बोस और सुभाष चन्द्र बोस का एक बड़ा अन्तर है। रास बिहारी बोस बचपन में माँ खो चुके थे। व्यवसाय के कारण पिता दूर रहते थे। पैत्रिक वात्सल्य के अभाव में बोस पले और बढ़े। जैसा कि आप समझ सकते हैं कि पिता को कमाई के कारण दूर रहना पड़ता था, तो बोस की आर्थिक स्थिति कदापि आरामदायक नहीं थी। प्रौढ शिक्षा के लिये वे आंग्लदेश भी नहीं जा पाये। बड़ी कठिनाई से यहीं पर विद्यालय से ऊत्तीर्ण हुए। गोरा-सर्वोत्तमत्व का पुतला या पूजक बनने की तनिक भी संभावना नहीं थी।

Here lies the great difference between Rash Behari Bose and Subhash Chandra Bose. Rash Behari Bose lost his mother when he was very young. His father was living away from him for work. Bose lived without receiving parental love. As you can guess from the fact that his father had to work in a distant area to earn a living, Bose was not at all financially comfortable. He could not even go to England for education. The best he could do was try to finish high school. There was not even the slightest possibility of him being brought up to be a white supremacist or worshiper.

Rash Behari Bose with his family, with Tagore as a guest
Rash Behari Bose with his family, with Tagore as a guest

一方でスバス・チャンドラ・ボースは父親が弁護士、親戚も学者や権力者揃いの蒼々とした顔ぶれでした。彼自身は幼い頃から英語で育ち、最高教育を受け、イギリスに留学し、弁護士になり、カルカッタ市長に選出され、インド国民会議の議長も勤め上げました。彼はエリート中のエリートなのです。それも、イギリスに仕立て上げられたエリートでした。

दूसरी ओर, सुभाष चन्द्र बोस कुलीन, विशिष्ट अधिकारी बनने के लिये पाले-पोसे गये, पिता अधिवक्ता थे, और बन्धुजन विद्वान्, अधिवक्ता और राजनीतिज्ञ थे। बचपन से आंग्ला में शिक्षण पायी, सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध शिक्षा पायी, और प्रौढ शिक्षा के लिये आंग्लदेश गये, अधिवक्ता बने, कोलकाता के महापौर (नगराध्यक्ष) बने, और एक बार इण्डियन नैशनल कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने। वे अभिजातीय वर्गे के भी समुन्नत स्तर से थे। अन्य सारी बातों से परे, उनकी समुन्नति का कारण था कि वह ब्रिटिश भारतीय परिवेश से थे।

On the other hand, Subhash Chandra Bose was brought up to be elite, and had a lawyer for a father, and relatives who were scholars, lawyers and politicians. He was educated in English since he was young, received the best possible education, went England for further education, became a lawyer, was chosen as the mayor of Calcutta, and once was the chairperson of the Indian National Congress. He was the elitist of elites. Above all else, his elitism came from being British Indian.

Subhas Chandra Bose with his wife and his close friends

現在世界中が讃えているインド独立の英雄は多くがイギリスに特権を与えられて育った人たちです。ガンジーはイギリスに留学して法律家になった人、ネールは子供の時からスコットランド人の家庭教師に教育されて、家の中では全て英語でした。そして、大学はもちろんイギリスでした。戦時中はイギリス側に立って、日本叩きをしたりして、さかんにラス・ビハリ・ボースのインド独立運動の邪魔をしました。ノーベル賞受賞者としてその権威を使って戦時中に日本叩きを続けたのはタゴールです。ネールもタゴールもイギリスに留学しましたが、タゴールは特に歴代イギリスから特権を与えられた特別な家庭に育ちました。

भारतीय मुक्ति संग्राम के तथाकथित शूरों में से अधिकांश प्रशंसित नेता ब्रिटन द्वारा समर्थित परिवेश से आगे आये थे। गान्धी ब्रिटन में प्रशिक्षित थे और वहीं अधिवक्ता बने। नहरू ने बचपन से एक निजी स्कोटदेशीय अध्यापक से शिक्षा ली, और घर में केवल आंग्ला बोलते थे। विश्वविद्यालयीय शिक्षा आंग्लदेश में पाये। बृहत् पूर्वी एशियाई युद्ध के समय उन्होंने उषाद्वीप का तिरस्कार करने में प्रचण्ड भूमिका निभाई। उषाद्वीप के बारे में कुत्सित कुप्रचार बड़े उत्साह से फैलाते रहे, और रास बिहारी बोस के संग्रामी प्रयास को जोखिम में डालने का पूरा प्रयास किया। नेहरू के संग रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने भी जापान-विरोधी अभियान चलाई। ठाकुर के वचन घातक थे, क्योंकि उनको नोबेल पुरस्कार से अलंकृत किया गया था, और इसलिये उनकी लेखनी भारी समझी जाती थी। ठाकुर ऐसे परिवार में जन्मे जो कई पीढ़ियों से ब्रिटिश के चहीते रहे, और उन्होंने भी आंग्लदेश में शिक्षा प्राप्त की।

Most of the so-called heroes of Indian independence who are currently being praised, were brought up in an environment supported by Britain. Gandhi was educated and became a lawyer in Britain. Nehru was educated by a Scottish private tutor since he was very young, and spoke nothing but English at home. He received his university education in England. During the Greater East Asia War, he became extremely active at Japan bashing. He passionately spread nasty propaganda about Japan, and he jeopardized Rash Behari Bose’s independence effort. Tagore also carried out an anti-Japan campaign with Nehru. Tagore’s words were deadly because, as he was a Nobel laureate, he held great authority. Tagore was born into a family that enjoyed special British privileges for generations, and was also educated in England.

Gandhi, Nehru and Tagore

つまり、インド独立運動の英雄として讃えられているのは殆どがココナッツだということです。悲しいことですね。このようにして、世界中に白人至上主義が定着していっているのです。

समाहार यह, कि आजकल भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अधिकांश शूर माने जाने वाले लोग वस्तुतः नारियल के निदर्श हैं। क्या यह दयनीय नहीं ? इसी उपाय से गोरा-सर्वोत्तमत्व जग भर में दृढता से जड़ डाल रही है।

In summary, most of those who are presently touted as Indian independence heroes are coconuts. Is this not sad? This is how white supremacy is firmly establishing itself throughout the world.

日本はバナナに侵され、インドはココナッツに侵されています。バナナやココナッツは外見では白人至上主義者だと見破ることが出来ないので厄介ですね。

उषाद्वीपी राष्ट्र को केलों ने बिगाड़ा, और भारत को नारियलों ने। नारियल और केले समस्यात्मक होते हैं, क्योंकि उनके बाहरी आकृति से उनके भीतरी गोरेपन का भान ठीक से नहीं हो पाता।

Japan has been ruined by bananas, and India by coconuts. Coconuts and bananas are problematic since, due to their outward appearance, you can never tell that they are in fact white on the inside.

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