抹消された遺骨 (रास बिहारी बोस के ओझिल भस्मावशेष – Disappeared ashes of Rash Behari Bose)

1951年9月8日には、日本がサンフランシスコ条約と日米安全保障条約に調印し、次の年1952年4月28日に日本の主権が回復したのですが、その時、ネルーの黒い策略が日本で蜷局を巻きました。ネルーといえば、大東亜戦争中極端な反日運動を展開し、日本の戦局を悪くし、ラス・ビハリ・ボースのインド独立運動を邪魔し続けた人物で、当時日本でたいそう人気の悪かった人でした。下に関連事項を年表のように箇条書きにしますね。

८ सप्तम्बर १९५१ को जापान ने अमेरिका के साथ सान फ़्रांसिस्को सन्धि और सुरक्षा संविदा पर हस्ताक्षर किये। अगले वर्ष, २८ अप्रैल १९५२ को जापान का स्वराट् शासन पुनःस्थापित किया गया। यह वही समय था जब नहरू के काले करतूते और दुष्ट चालें उषाद्वीप पर अवतरित हुए। विगत बृहत्तर पूर्वी एशियाई युद्ध के समय नहरू जापान के विरुद्ध अतिविद्रूपित दुष्प्रचार का लेखन और प्रसार का दायित्व निभा चुके थे। वे जापान के संग्रामी प्रयत्नों और रास बिहारी बोस के स्वतन्त्रता आन्दोलन में लगातार बाधा डालते रहे। सहज बात हैं कि उन दिनों नहरू उषाद्वीप में अति  अलोकप्रिय व्यक्ति रहे। इसे समझने के लिए, मैंने प्रासंगिक घटनाओं की एक छोटी सूची तैयार की है और उसे नीचे दिए गए समयरेखा पर सजाया है।

On September 8, 1951, Japan signed the San Francisco Treaty and the Security Treaty between the US and Japan. The following year, on April 28, 1952, Japan’s sovereign rule was restored. It was at that time that Nehru’s dark trickery and evil scheming descended upon Japan. During the Greater East Asia War, Nehru was responsible for developing and expanding extreme anti-Japanese sentiment. He continually hindered Japan’s war efforts and Rash Behari Bose’s Indian independence movement. In those years, Nehru was obviously an extremely unpopular figure in Japan. To illustrate this, I have compiled a small list of relevant events and arranged them into the timeline below.

  • 1949年 インド首相ネルーが東京に象を贈る。象の名はネルーの娘の名、インディラ。ここから「やさしいインドのおじさん」のイメージをつくる
  • 1952年 日印平和条約締結
  • 1954年 George Ohsawaが The Two Great Indians in Japan を出版、ラス・ビハリ・ボースがどんな人物であったかを英語で描く
  • 1954年 相馬愛蔵死亡
  • 1955年 相馬黒光死亡
  • 1957年 相馬夫妻の長男の相馬安雄死亡
  • 1957年 ネルーがラス・ビハリ・ボースの愛娘哲子を訪れ、ボースの遺骨と遺品をインドに送ることを要請する
  • 1958年 スバス・チャンドラ・ボースの遺骨返還を目的としたチャンドラ・ボース・アカデミーが結成される
  • 1959年 Rash Behari Basu – His Struggle for Indian Independence が出版される
  • 1959年 ラス・ビハリ・ボースの遺骨と遺品の大半がインドに送られ、行方不明になる
  • १९४९: नहरू, भारत के प्रधान मन्त्री, एक हाथी को तोक्यो भेजते हैं। हाथी का नाम नहरू की बोटी इन्दिरा के नाम पर रखा गया है। इसके साथ हि नहरू की एक “स्नेहशील देसी दादाजी” जैसी छवि सक्रिय रूप से बनाने का प्रयास किया गया है।
  • १९५२: भारत-उषाद्वीप शान्ति सन्धि पर हस्ताक्षर जोड़े गए।
  • १९५४: जार्ज ओह्सावा ‘उषाद्वीप में दो महान् भारतीय’ नामक पुस्तक प्रकाशित करते हैं, जिससे आंग्ला-भाषी पाठकों को रास बिहारी बोस के बारे में बहकाया जाता है।
  • १९५४: सोमा आयज़ो स्वर्ग सिधारे।
  • १९५५: सोमा कोक्को ने प्राण त्यागे।
  • १९५७: आयज़ो और कोक्को के ज्येष्ठ पुत्र सोमा यासुओ परलोक सिधारे।
  • १९५७: नहरू रास बिहारी बोस की बेटी तेत्सुको से मिलने गए और बोस के अवशेषों को भारत भेजने का अनुरोध करते हैं।
  • १९५८: जापान में सुभाष चन्द्र बोस विद्याशाला का न्यास हुआ, जिसका उद्देश्य सुभाष चन्द्र बोस के अवशेषों को भारत लौटाना था ।
  • १९५९: ‘रास बिहारी बसु: भारतीय स्वतन्त्रता हेतु उनका संघर्ष’ प्रकाशित हुआ।
  • १९५९: रास बिहारी बोस के भस्मावशेष और पुरावशेष कृतियाँ भारत भेजे जाते हैं और आगे उनका कोई अता-पता नहीं मिलता।
  • 1949: Nehru, the Prime Minister of India, sends an elephant to Tokyo. The elephant is named after Nehru’s daughter, Indira. With this, the image of Nehru as a “friendly Indian grandpa” is actively created.
  • 1952: The Indo-Japan Peace Treaty was signed.
  • 1954: George Ohsawa published The Two Great Indians in Japan, misinforming English speakers about Rash Behari Bose.
  • 1954: Soma Aizo passed away.
  • 1955: Soma Kokko passed away.
  • 1957: Aizo and Kokko’s eldest son, Soma Yasuo, passed away.
  • 1957: Nehru visited Rash Behari Bose’s daughter, Tetsuko, and requested Bose’s remains to be sent to India.
  • 1958: The Subhas Chandra Bose Academy of Japan was established, with the goal of returning Subhas Chandra Bose’s remains to India.
  • 1959: Rash Behari Basu: His Struggle for Indian Independence was published.
  • 1959: Rash Behari Bose’s remains and artifacts were sent to India, and their whereabouts became unknown.

ラス・ビハリ・ボースの遺骨と遺品は、インドに霊廟を作り博物館をつくるという名目で哲子にインドへ贈らせたのですが、その行方は知れず渾然と消えてしまいました。インドのどこかにあるのかもしれないし、捨てられてしまったという危惧もあります。

रास बिहारी बोस के अवशेष और पुरावशेष तेत्सुको से इस वचन पर भारत भिजवा दिए गए थे कि वहाँ एक स्मारक और संग्रहालय का निर्माण होगा। किन्तु वास्तव में वे ओझिल हो गए और उनका कोई अता-पता मिलना बन्द हो गया। शायद वे भारत में आज भी कहीं पर संगृहीत हों, परन्तु यह शंका भी है कि उन्हें फेंक दिया गया। 

Rash Behari Bose’s remains and artifacts were taken from Tetsuko and she was made to deliver them to India upon the promise that a mausoleum and museum would be constructed. In reality, however, they vanished and their whereabouts became unknown. They may still be stored somewhere in India to the present day, but there is also the concern that they have been thrown away.

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